Wednesday, 12 February 2014

                                                       एक्सोर्सिस्म    'समीक्षा'




निर्देशक विलियम फ्रेडकिन दवरा निर्देशित हॉरर फ़िल्म एक्सोरसिस्ट १९७३ में बनी उस दौर कि  सबसे डरावनी व भयानक फ़िल्म है।  फ़िल्म की कहानी फ़िल्म के मुख्य पात्रा १२ साल की लड़की रेगन (लिंडा ब्लेअर ) के इर्द गिर्द बुनी गयी है।

रेगन अपनी माँ के साथ जॉर्ज टाउन में रहती है , जहाँ उसके ऊपर रूहानी आत्मा का वास हो जाता है।  रूहानी ताकत की वजह से  दिन प्रतिदिन रेगन की हलत बिगड़ती जाती है , जिसे लेकर उसकी माँ क्रिस (एलेन बुरस्तीन) हर बड़े डॉक्टर व साइकैट्रिस्ट के पास जाती है परउसकी हालत में सुधार नहीं होता।  फिर वो एक दिन डेमिन( जैसन मिलर )  से मिलती है और फिर शुरू होता है एक्सोर्सिस्म।

शुरुआत में फ़िल्म को दो अलग सीन में दिखाया गया है , जिसे आगे जाकर जोड़ा गया है।  शुरुआत में फ़िल्म ध्यान से न देखने पर पूरी मूवी समझ के परे हो सकती है।  इस फ़िल्म को दरवानी फिल्मो कि श्रेणी में ऊपर स्थान दिया जा सकता है , जिसका मुख्य कारण फ़िल्म के कई डरावने सींस है।

रेगन के ऊपर जिस प्राकार शैतानी आत्मा का प्रभाव व उसके संग होने वाली अजीबो गरीब हरकत दिखाया गया है उससे डर कि आहट अपने आप हो जाती है।  फ़िल्म के कुछ सीन न केवल डरावने है बल्कि हिंसक भी है।  एक सीन में जब रेगन क्रॉस को  अपने में घोपती है , तो लगता है जैसे सामने ही कुछ हो रहा है।



अगर फ़िल्म के डरावने शॉट की बात करे , तो रेगन का सर के बल चलना , बेड का हिलना व हवा में उड़ाना कई ऐसे सीन है जो फ़िल्म को दरवानी बनाने में विशेष भूमिका निभाई है।  साथ ही अगर फ़िल्म के म्यूजिक व मेक अप की ऒर ध्यान दे तो इसका भी डर पैदा करने में विशेष भूमिका रही है।



फ़िल्म कि जो सबसे अच्छी बात है , वो है कैमेरा एंगलिंग व उपकरण के आभाव में इतनी अच्छी एडिटिंग।  जिसेआज भी देख ये ज़रा सा भी महसूस नहीं होता की ये १९७३ कि फ़िल्म है।

फ़िल्म में अभिनय की बात करे तो , छोटी लड़की की भूमिका में नजर आयी लिंडा ब्लयेर  की जबदस्त एक्टिंग है , वही माँ कि भूमिका में नजर आयी एलेन बुरस्तीन ने भी कमाल की अदाकारी की है।  फ़िल्म के अन्य पात्र डेमिएन के रूप में नजर आये जैसन मिलर व फादर डायर के भूमिका में नजर आये विलियम ओमल्ली ने भी दर्शको को निराश नहीं किया है

निर्देशन में विलियम फ्रेडकिन अपनी इमेजिनेशन को परदे पर उकेरने में पुई तरह सफल हुए है।

(जैसा कि मैंने व्यक्तिगत तौर पर फ़िल्म कि समझने कि कोशिश की , मुझे इस फ़िल्म में फ़िल्मी दुनिया के ऑचर थ्योरी , फोरग्राउन्डिंग  थ्योरी कंस्ट्रक्टिविसम  थ्योरी देखने को   मिला।   )

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