Tuesday, 4 February 2014

                            Alice in Wonderland   सपनो की दुनिया 





ये किसी सपने से कम नहीं जहाँ कुत्ते बोलते हैं , मेंढक दौड़ता है  और फूल हंसते हैं। पर एक सपनो की दुनिया को हक़ीक़त की तरह परदे पे उकेरना किसी कला से कम नहीं।  इस फिल्म की कहानी कुछ ऐसी ही है।  

  फ़िल्म "ऐलिस इन वंडरलैंड" की कहानी १८६५ में 'लेविस करोल' द्वारा लिखित नोवेल "ऐलिस"स एडवेंचर इन वंडरलैंड" से इंस्पायर्ड है।  फ़िल्म के निर्देशक टिम बर्टन ने जो बारीकी से फ़िल्म का निर्देशन किया है वो वाकई काबिले तारीफ है। फ़िल्म कि कहानी मुख्य रूप से ऐलिस को ध्यान में रख कर बनायीं गयी है।  ऐलिस बचपन से हमेशा एक ऐसे दुनिया के बारे में सोचती थी जो सपनो जैसा हो।   एक दिन ऐलिस एक खरगोश के बिल में गिर जाती है , और जहाँ कि दुनिया वास्तविक दुनिया से पूरी तरह परे होती है। इस दुनिया में दो तरह के लोग होते है बुरे व अच्छे।  बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए ऐलिस वहा पर एक भविष्यवाणी के  अनुसार पहुचती है।   बिल के अंदर कि दुनिया को जबर्दस्त ग्राफ़िक्स , एनिमेशन से सजाया गया है।

 अंदर कि दुनिया को एक ग्रीन रूम में शूट किया गया है।  पर विभिन्न प्रकार के कैमरा  एंगेल्स व शॉट्स कि वजह से ये ज़रा सा भी मालूम नहीं पड़ता।  एनीमेशन फ़िल्म खासकर  बच्चो को ध्यान में रखकर बनायीं जाती है, पर ऐलिस इन वंडरलैंड को देख ये बात बेईमानी समझ आती है।

 फ़िल्म में अभिनय की बात करें तो ऐलिस कि भूमिका में नजर आयी मिया वसीकोवस्का ने जबर्दस्त अभिनय किया है।  फ़िल्म के दूसरे छोर को थामे लाल रानी की भूमिका में हेलन बोहन कार्टन ने भी लोगो का दिल जीता है।  फ़िल्म के और दूसरे पात्र मैड हाटर ( जॉनी डीप ) सफ़ेद रानी ( ऐनी हटवाय ) इत्यादि ने भी अच्छि अभिनय का परिचय दिया है।

आखिर में सिर्फ इतना कहाजा सकता है , कि  एनिमेटेड फिल्मे सिर्फ बच्चो के लिए नहीं होती।

फ़िल्म ऐलिस इन वंडरलैंड को मै ६ में से ५ स्टार्स देना पसंद करूंगा।

(जैसा कि मैंने व्यक्तिगत तौर पर फ़िल्म कि समझने कि कोशिश की , मुझे इस फ़िल्म में फ़िल्मी दुनिया के ऑचर थ्योरी , फोरग्राउन्डिंग  थ्योरी कंस्ट्रक्टिविसम  थ्योरी देखने को   मिला।   )

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