Friday, 7 March 2014



                           ध्वनि क्या है ?





ध्वनि सिद्धांत  के जनक आनंदवर्धन को मना जाता है।  ये भारतीय सिद्धान्त है जो , कविता कि आत्मा होती है।  आनदवर्धन ध्वनियलोका  नामक पुस्तक के लेखक भी थे , जिनका मानना था , कि कविता भाव उसी रूप में जिस रूप में कवी लिखता है  तभी  उसके श्रोताओ तक पहुचेगा जब उसमे ध्वनि हो।
वायुमण्डल में तरंगों की हलचल को ध्वनि कहा जाता है। ध्वनि कुछ भी हो सकता है हवा के चलने कि ध्वनि, बिजली कड़कने कि ध्वनि, बारिश कि ध्वनि , पक्षियों के चहचहाने कि ध्वनि, मोटर कार कल कारखानो व मशीनो के चलने कि ध्वनि ये कुछ भी हो सकती है।  ध्वनि को हम उसके प्रकृति के अनुसार कई भागो में बाँट कर देख सकते है।

तेज ध्वनि, मधुर ध्वनि, उच्चारण में उदात्त, अनुदात्त, स्वरित इत्यादि ध्वनियों के अनेकानेक भेद हैं। बहुत से लोग ध्वनियों के माध्यम से पशु-पक्षियों की पहचान कर लेते हैं। आजकल ध्वनि प्रदूषण से शहर काँप रहे हैं। निवारण के लिए ध्वनिरोधक लगा रहे हैं, वृक्षारोपण कर रहे हैं किन्तु अध्यात्म में इन ध्वनियों का कोई उपयोग नहीं है। अध्यात्म में जिस ध्वनि की बहुत बड़ी महिमा है वह भजन की जागृति के साथ है।

ध्वनि का हमारे जीवन में बहुत बड़ीभूमिका होती है।  ध्वनि न सिर्फ हमरा ध्यान किसी ओर करती है , बल्कि उस ध्वनि का उससे एक रिश्ता भी बताती है।  उदाहरणार्थ - आदिकाल में युद्ध शुरू होने के पहले  संख कि ध्वनि होती थी , जो युद्ध के शुरू होने का संकेत देती थी।  इसी तरह कोई सूचना देने के लिए ढोल नगाड़े से लोगो को सूचित किया जाता था। 


आज हम जिस विषय को ध्यानगत रखकर यहाँ ध्वनि कि बात कर रहे है , वो है फ़िल्म।  वैसे तो फ़िल्म में ध्वनि नहीं बल्कि संगीत होती है , पर इस संगीत कि भी उत्पाती ध्वनि से ही होती है।  हर संगीत यंत्रो से ध्वनि निकलती है , जो सरगम के सात रंग में घुलकर संगीत बन जाती है। 


फिल्मो में अगर संगीत कि बात करे तो विशेषकर भारतीय फिल्मो में ये रेलवे ट्रैक पर रेल कि तरह होता है।  कहने का तात्पर्य जिस प्रकार रेल पटरी पर चलती है , उसे पटरी के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता है उसी प्रकार फिल्मो को लोकप्रिय बनाने में संगीत का काम होता है।  

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