अगर संम्पादन कहानी है , तो मोंटाज कविता
है।
अगर संम्पादन कहानी है , तो मोंटाज कविता है।
इस वाक्य को समझने के लिए सर्वप्रथम हमें कहानी व कविता के प्रकृति को
समझना होगा। मनुष्य की सहज एवं स्वाभाविक
अभिव्यक्ति का रूप गद्य है। जबकि कविता शब्दो का सजावटी संगरह है। कविता
कम शब्दो में अधिक से अधिक अर्थ
बयान करती है। जबकि कहानी एक लम्बी गाथा
होती है।
अब अगर हम बात मोंटाज थ्योरी कि करे तो , मोंटाज थ्योरी
फ़िल्म के संम्पादन की एक कला है।
जिसके अंतर्गत दो या दो से अधिक क्लिप्स को एक साथ जोड़कर दिखाया जता है। मोंटाज थ्योरी
फिल्मो में एक नया क्रान्ति है जो दर्शको को एक नयाम आयाम सीखने को देता
है।
फिल्मो में अक्सर ऐसा होता है जब दो तीन सीन को एक साथ
जोड़कर दिखाया जाता है , जो मोंटाज थ्योरी का उदाहरण होता है। मोंटाज थ्योरी से कम समय में अधिक से अधिक
कहानी को बयां किया जाता है।
मोन्टाज थ्योरी का श्रेय सर्जिन आइंस्टीन को जता है। आइंस्टीन वो पहले थे जो इसके बारे में पहली बार
सोचा था , और फिर इसे फ़िल्म
में यूज़ किया जिसका प्रभाव काफी हुआ था।
आज वर्त्तमान में लगभग हर फिल्मो में मोंटाज थ्योरी देखने को मिलती
है। थ्योरी के माध्यम से फ़िल्म को न केवल
आकर्षक बनाया जाताहै बल्कि कम समय में
अधिक से अधिक कहानी को बताया जाता
है।
कविता मोंटाज है , हर कविता एक साथ कई अर्थ लेकर आगे बढाती है , कविताओ में इतना
सामर्थय होता है , कि वो कम से कम
शब्दो में अधिक जानकारी व कविता का भाव अपने पाठको को बता सके। कविता कहानी में यही मुलभुत अंतर होता है , कि एक अधिक
शब्दो में कहानी बयान करती है तो दूसरा कम
से कम।
http://ewaneumann.com/websites/eisenstein/theory_of_मोन्तगे्त्म्ल
http://ewaneumann.com/websites/eisenstein/theory_of_मोन्तगे्त्म्ल
http://www.amazon.co.uk/Film-Theory-Anthology-Robert-Stam/dp/0631206264

No comments:
Post a Comment