रुडोल्फ अर्नहेम फ़िल्म थ्योरी
रुडोल्फ अर्नहेम फ़िल्मी सिद्धान्त के अनुसार मूक व ब्लाक एंड वाइट फिल्मे सबसे अच्छी व प्रभावकारी होती है। ब्लैक एंड वाइट फिल्मो से न केवल एक प्रभावी
मेसेज दर्शको तक पहुचता है बल्कि उन्हें इस कला
को समझने में भी आसानी होती
है। फ़िल्म एक कला है और ये कला तभी कला हो सकती है , जब इसमें सच्चाई
व ईमानदारी हो। मूक फिल्मे आसानी से फ़िल्म
के भावना व कलाकार के मानवी संवेदना को दर्शको तक पहुचाती है।
मूक फिल्मे सवाक फिल्मो से अधिक आसानी से कहानी के मर्म को
दर्शक तक पहुचाती है ऐसे में मै नहीं सोचता कि , फिल्मो में साउंड ना हो तो वो कहानी अधूरी रह
जाती है। फ़िल्म तो एक जिवंत कला है जिसे
देखने के लिए सिर्फ आँखों कि जरुरत होती है , और समझने के लिए थोड़ी सी इंसानी सोच की।
एक फ़िल्म निर्देशक की
इतनी जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वो अपने कहानी को इस तरह परदे पर उकेरे कि
दर्शक को शब्द व साउंड से कुछ मतलब ही ना हो।
उन्होंने अपने फ़िल्म थ्योरी के बारे में अधिकाधिक मूक फिल्मो के बारे में
ही लिखा है।
अपने एक साक्षत्कार में उन्होंने बताया कि , मैंने फिल्मो के
ऊपर सिर्फ थ्योरी ही नहीं बनाई बनाया
बल्कि फिल्मो को जिया है , है मै पहले से ही
फिल्मो को ऑब्ज़र्व किया करता था। एक दौर
था जब मैं फिल्मो की समीक्षा भी किया करता था , ऐसे में सिर्फ मैं फिल्मो के प्रकृति व उसके
प्रस्तुतीकरण पर अधिक ध्यान देता था।
कला एक माध्यम है लोगो को
बदलाव से परिचित कराने का , और उन्हें इस बात का एहसास करने का कि , कैसे दुनिया बदल
रही है , ऐसे में कला का
प्रस्तुतीकरण जितना साफ़ व साधारण होगा उतना ही ये अच्छा होगा।
http://cabinetmagazine.org/issues/2/rudolfarnheim.php
http://zigzagwritings.com/Strength_In_Writing/Arnheim.html


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